हमराही

डायबिटीज़ से मानसिक स्वास्थ्य कैसे प्रभावित होता है?

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं डायबिटीज़ को नियंत्रित करने के लिए अपनाए जाने वाली कोशिशों में बाधा पहुुंचा सकती हैं | आपके विचार, भावनाओं, विश्वास और नज़रिया से शरीर के संपूर्ण कार्य प्रभावित होते हैं। इलाज न किए जाने पर, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं डायबिटीज़ के बढ़ने का कारण बन सकती हैं। इसी तरह, डायबिटीज़ से संबंधित बीमारी के कारण मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

डिप्रेशन एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति हमेशा उदास महसूस करता रहता है और आनंददायक गतिविधियों में उसकी रुचि कम हो जाती है। इससे डायबिटीज़ के नियंत्रण के लिए आपकी कोशिशों के साथ-साथ आपकी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ, दोनों बहुत प्रभावित हो सकते हैं और आप अपने आपको कमज़ोर महसूस कर सकते हैं। अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं होने पर डायबिटीज़ के कारण हार्ट संबंधी रोग और नसों से संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है | डायबिटीज़ वाले लोगों में, बिना डायबिटीज़ वाले लोगों की तुलना में डिप्रेशन की समस्या होने की संभावना 2 से 3 गुना अधिक हो जाती है। इस समस्या के कारण, इलाज के विकल्प थेरेपी, दवा या दोनों अत्यधिक प्रभावी हो सकते हैं। आमतौर पर इलाज न कराने पर डिप्रेशन की समस्या ठीक होने के बजाय और अधिक बिगड़ जाती है।

डिप्रेशन की समस्या गंभीर होने पर निम्न अलग-अलग तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैंः

  • उदासी या अकेलापन की भावना का अनुभव होना
  • खुशी वाली गतिविधियों में पहले जैसी रुचि न होना
  • अधिक भोजन करना या भूख न लगना
  • नींद का पैटर्न खराब होना, नींद न आना या बहुत अधिक नींद आना
  • ध्यान केंद्रित करने या निर्णय लेने में कठिनाई होना
  • थकान होना
  • निराशा, चिड़चिड़ापन, चिंता या अपराधबोध की भावना महसूस होना
  • शारीरिक समस्या, जैसे दर्द, पीड़ा, सिरदर्द, ऐंठन या पाचन संबंधी समस्याएं होना
  • खुद को नुकसान पहुंचाने या मौत का विचार आना

अतिरिक्त समस्या के रूप में स्ट्रेस और एंग्जायटी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जिन पर भी विचार करना चाहिए। स्ट्रेस जीवन में होने वाली एक सामान्य समस्या है, जो ट्रैफिक की भीड़, परिवार के सदस्य द्वारा की जा रही मांगों या डायबिटीज़ नियंत्रण के लिए अपनाई जाने वाली दैनिक रूटीन जैसे अनेक कारणों से हो सकती है। स्ट्रेस हार्मोन से भी ब्लड शुगर के लेवल में अप्रत्याशित रूप से उतार-चढ़ाव हो सकता है और अगर लंबे समय तक स्ट्रेस की समस्या (विशेष रूप से बीमारी या चोट के कारण) बनी रहती है, तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है और स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

एंग्जायटी में चिंता, डर, या लगातार स्ट्रेस में रहने के लक्षण महसूस होते हैं, जो अक्सर डायबिटीज़ जैसी पुरानी समस्या पर नियंत्रण पाने की वजह से हो सकती है। डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों को डायबिटीज़ डिस्ट्रेस की स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है, जिसमें स्ट्रेस, डिप्रेशन और एंग्जायटी के साथ कुछ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। डिप्रेशन के विपरीत, डायबिटीज़ डिस्ट्रेस, डायबिटीज़ के कारण पैदा वाले कारणों, जैसे हाइपोग्लाइसेमिया के डर या लो ब्लड शुगर लेवल से जुड़ी हो सकती है। पारिवारिक और सामाजिक व्यवहार और स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं जैसे बाहरी कारक भी डायबिटीज़ डिस्ट्रेस को प्रभावित कर सकते हैं। आमतौर पर डायबिटीज़ डिस्ट्रेस के इलाज के लिए दवा का उपयोग नहीं किया जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्ट्रेस को डायबिटीज़ पर बेहतर तरीके से नियंत्रण पाकर, लोगों की सलाह और सहायता लेकर कम किया जा सकता है।

अगर आपको डिप्रेशन, स्ट्रेस या एंग्जायटी के लक्षण महसूस हो रहे हों, तो इलाज के लिए तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। डिप्रेशन के मामले में तुरंत इलाज कराने से आपको संपूर्ण स्वास्थ्य, लाइफस्टाइल को ठीक करने और डायबिटीज़ पर प्रभावी नियंत्रण पाने में विशेष रूप से लाभ हो सकता है।31,32